महराजगंज महोत्सव की अंतिम शाम लोकप्रिय लोकगायिका कल्पना पटवारी के नाम

महराजगंज महोत्सव की अंतिम शाम लोकप्रिय लोकगायिका कल्पना पटवारी के नाम रही। रविवार की शाम जैसे ही कल्पना मंच पर पहुंचीं, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने छठ गीत "उगी हे दीनानाथ..." से कार्यक्रम की शुरुआत की, तो दर्शक भावविभोर होकर झूम उठे। इसके बाद उन्होंने स्वर कोकिला दिवंगत शारदा सिन्हा के चर्चित गीत "बलमुआ कइसे तेजब हे छोटी ननदी..." और "कोयल बिन बगिया..." गाकर श्रोताओं को सुरों की दुनिया में खो जाने पर मजबूर कर दिया।
आगे उन्होंने "छुट्टी लेके आई ए बलम जी..." और "हमसे भंगिया न पिसाई ए गनेश के पापा..." गीत प्रस्तुत कर भक्ति रस का वातावरण बना दिया। जब उन्होंने "बम-बम बोल रहा है काशी..." गाया, तो पूरा पंडाल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
अंत में फिल्म नदिया के पार का अमर गीत "कौने दिशा में लेके चला र बटोहिया..." सुनाकर कल्पना पटवारी ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। महोत्सव की यह अंतिम शाम संगीत, भक्ति और लोकसंस्कृति की मधुर अनुभूति के साथ अविस्मरणीय बन गई।
जिला ब्यूरो- रंजीत, महाराजगंज ।

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