आगे उन्होंने "छुट्टी लेके आई ए बलम जी..." और "हमसे भंगिया न पिसाई ए गनेश के पापा..." गीत प्रस्तुत कर भक्ति रस का वातावरण बना दिया। जब उन्होंने "बम-बम बोल रहा है काशी..." गाया, तो पूरा पंडाल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
अंत में फिल्म नदिया के पार का अमर गीत "कौने दिशा में लेके चला र बटोहिया..." सुनाकर कल्पना पटवारी ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। महोत्सव की यह अंतिम शाम संगीत, भक्ति और लोकसंस्कृति की मधुर अनुभूति के साथ अविस्मरणीय बन गई।
जिला ब्यूरो- रंजीत, महाराजगंज ।
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