तहसील अध्यक्ष मिथला शरण दुबे की अगुवाई में सौंपा गया ज्ञापन, पत्रकारों की समस्याओं के समाधान की मांग
उदय समाचार । कानपुर । ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, घाटमपुर इकाई द्वारा पत्रकारों से संबंधित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री संबोधित ज्ञापन सौंपा गया । आपको बता दें कि शुक्रवार को संगठन के तहसील अध्यक्ष मिथला शरण दुबे की अगुवाई में घाटमपुर विधायिका सरोज कुरील के द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेज कर सरकार के समक्ष सात सूत्रीय मांगे रखी गई है, घाटमपुर विधायिका की अनुपस्थिति में विधायक प्रतिनिधि तन्मय तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया ।
ज्ञापन में ग्रामीण पत्रकारों से संबंधित मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया है, जिसमें ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के लिए राज्य मुख्यालय लखनऊ में शासन की ओर से, अन्य संगठनों की भांति कार्यालय हेतु भवन का आवंटन दारुलसफा या ओसीआर में किया जाए। जिससे सुदूर जनपदों से आने वाले पत्रकारों को रुकने तथा प्रदेश स्तरीय बैठके करने की समस्या का निदान हो सके । मान्यता प्राप्त पत्रकारों की तरह ही ग्रामीण पत्रकारों को भी आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाए, ताकि वह और उनका परिवार मुफ्त कैशलेश इलाज करा सके । इस योजना में केवल अखबारों में कार्यरत संवाददाताओं को शामिल किया जाए, जिनकी सूची जिला सूचना कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।
ग्रामीण पत्रकारों को शासन स्तर से बीमा योजना में शामिल किया जाए। साथ ही लंबे समय से आंचलिक पत्रकारिता कर रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ग्रामीण पत्रकारों को पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। इनकी सूची भी जिला सूचना कार्यालय के माध्यम से तैयार की जाए । ग्रामीण पत्रकारों के विरुद्ध कोई भी प्राथमिकी दर्ज करने से पूर्व जिला पुलिस के किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा अनिवार्य रूप से जांच की जाए, ताकि पत्रकारों का अनावश्यक उत्पीड़न रोका जा सके।
राज्य एवं जिला स्तर पर स्थायी समिति की भांति तहसील स्तर पर भी प्रशासनिक अफसरों के साथ ग्रामीण पत्रकारों की नियमित बैठकें कराई जाएं।
शासन के निर्देशानुसार ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के सभी संबंधित तहसील अध्यक्षों को इसमें अनिवार्य रूप से शामिल किया जाय । प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना में मृत ग्रामीण पत्रकार के परिजनों को किसान बीमा योजना की तरह तत्काल पांच लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाए। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष से 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए, ताकि शोकग्रस्त परिवार को संकट की घड़ी में सहारा मिल सके। आदि मांगे सरकार के समझ रखी गई है ।
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