महराजगंज,सदर विकासखंड सभागार में सामाजिक सद्भाव की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सह विभाग कार्यवाह शिवाकांत ने कहा कि सभी हिंदू समाज को मिलकर राष्ट्र की आराधना करनी चाहिए और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हम संगठित और एकजुट रहेंगे तो भारत पुनः “सोने की चिड़िया” बन सकता है और एक समर्थ, आत्मनिर्भर राष्ट्र की संकल्पना साकार हो सकती है।
यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चल रहे पांच परिवर्तनों एवं सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम की श्रृंखला का हिस्सा था। इसी क्रम में सदर खंड में यह बैठक संपन्न हुई।
*सनातन परंपरा में सामाजिक समरसता की जड़ें*
कार्यक्रम की अध्यक्षता गायत्री परिवार के राम प्रीत गुप्त ने की। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन परंपरा में सामाजिक सद्भाव बचपन से जीवन के प्रत्येक संस्कार और रीति-रिवाज में समाहित रहा है। सनातन धर्म ने विश्व को मार्गदर्शन देने का कार्य किया है और आज भी उसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
संघ चालक साधु शरण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि जब समाज संगठित और एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तभी वह विश्व पटल पर अग्रणी और विकसित बन सकता है।
खंड कार्यवाह सुनील मिश्र ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए कहा कि हम सबको मिलकर नए और समर्थ राष्ट्र की संकल्पना को साकार करना होगा।
*युवाओं की सक्रिय भागीदारी*
बैठक में सह खंड कार्यवाह धर्मेंद्र, विद्यार्थी परिषद के मयंक मणि, आदित्य सिंह, दलजीत सिंह, विमल कुमार पांडेय, दीपक मद्धेशिया, राघवेंद्र मौर्य, अशोक पटेल, सुनील कुमार गुप्ता सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित जनों ने एक स्वर में समाज में समरसता, एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का संकल्प करें।
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