महराजगंज, पनियरा ग्राम पंचायत जड़ार, क्षेत्र पनियरा में आयोजित श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ के द्वितीय दिवस का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं अनुशासन पूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यज्ञ स्थल पर प्रातः 9 बजे से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मंत्रों की गूंज, हवन सामग्री की सुगंध और श्रद्धालुओं की आस्था ने समूचे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया।
हवन कार्यक्रम के पूर्व युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के देवदूतों द्वारा यज्ञ की महिमा पर अत्यंत रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन का वैज्ञानिक आधार भी है।
देवदूतों ने वर्ष 1995 में गोरखपुर के रामगढ़ ताल तट पर आयोजित 1000 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय कुछ वैज्ञानिकों ने आशंका जताई थी कि इतने बड़े स्तर पर हवन से वातावरण में प्रदूषण बढ़ सकता है। इस शंका के समाधान हेतु ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान, हरिद्वार द्वारा स्पष्ट किया गया कि यज्ञ से प्रदूषण नहीं बढ़ता, बल्कि वायु, जल और मिट्टी की शुद्धि होती है।
सत्यापन के लिए विभिन्न वैज्ञानिक टीमों ने यज्ञ से पूर्व हवा, पानी और मिट्टी के नमूने सुरक्षित रखे। यज्ञ के समापन के बाद जब इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच की गई, तो प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। इस शोध से यह सिद्ध हुआ कि यज्ञ मानव जीवन और प्रकृति दोनों के लिए कल्याणकारी है।
देवदूतों ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “यज्ञ मानव का जुड़वा भाई है” और मानव को यज्ञीय परंपरा से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय संस्कृति को समाप्त करने के अनेक प्रयास किए, परंतु यज्ञ परंपरा आज भी जीवित है और मानवता को दिशा दे रही है।
कार्यक्रम अखिल विश्व की शांति, सद्भाव और विकास की कामना के साथ सम्पन्न हुआ। अंत में देवदूतों ने सायं 6 बजे आयोजित होने वाली प्रज्ञा पुराण कथा का संक्षिप्त परिचय देते हुए क्षेत्रवासियों से समय पर उपस्थित होकर कथा श्रवण करने एवं उसके विचारों को जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामवासी एवं साधक उपस्थित रहे। संपूर्ण वातावरण श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
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