पंचकूला, हरियाणा  । ‘काव्य कदम’ साहित्यिक संस्था (हरियाणा) का मासिक कवि सम्मेलन प्रदेशाध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ की अध्यक्षता में सेक्टर-26 (पंचकूला) स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर के सभागार में आयोजित हुआ। 
कवि सम्मेलन की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार संगीता बेनीवाल और विशिष्ट अतिथि ट्राइसिटी के मशहूर गज़लकार राजन तेजी ‘सुदामा’ रहे। मंच संचालन संस्था के प्रदेशाध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ द्वारा किया गया। 

गजलकार राजन तेजी ‘सुदामा’ ने सुंदर छंद ‘आपके समूह में प्रवेश था कमाल का, दाम का पता चला पिसान और दाल का’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। अध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ ने संस्था को समर्पित स्वागत गीत ‘मैं, तुम नहीं, हम हैं काव्य क़दम’ सुनाकर संस्था के प्रति आस्था प्रकट की। अनीता नरवाल ने सामाजिक व्यथा पर भावपूर्ण कविता ‘रात-दिन गीत ऐसे गाते हैं, जैसे रूठों को वो मनाते हैं’ सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। 

संस्था के प्रदेश प्रवक्ता राम कुमार वर्मा ‘राम’ ने अपनी खूबसूरत रचना ‘आप सबका बढ़िया प्यार चाहिए, बस एक शुक्रिया उधार चाहिए’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। 
कवि वीरेंद्र राय ने ‘हर सवाल का वह शख़्स जवाब छोड़ गया, मेरे हाल पे मुझको हम-रकाब छोड़ गया’ पेश कर महफ़िल जमा दी। जीरकपुर से पधारी कवयित्री जया सूद ने समाज पर कटाक्ष करते हुए ‘गिरगिटों से भरा कलयुगी बगीचा, झूठ, फ़रेब का सजता गलीचा’ सबकी वाहवाही लूटी।

ममता ग्रोवर ने ‘हकीकत को झुठलाना क्यूं, झूठ को सच बतलाना क्यूं’ प्रस्तुत कर समां बांध दिया। हास्य कवि अश्वनी मल्होत्रा 'भीम' ने हास्य कविता ‘उल्लूओं की कविता’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। राकेश कुमार ने शानदार प्रस्तुति दी ‘दे दी है सबके सामने सफाई आपने, सामने से क्यूं नज़रफिर यूं चुराई आपने’।

संदीप भगवाड़िया ने राजन तेजी ‘सुदामा’ द्वारा रचित खूबसूरत ग़ज़ल ‘बुरा जानते हैं, भला जानते हैं’ पेश की। सीमा चहल ‘पुष्प’ ने ‘यादों के पन्नों में एक तस्वीर पुरानी मिली है’ सुनाकर समां बांध दिया। शशि जरोड़िया ने डॉ० भीम राव अम्बेडकर पर खूबसूरत रचना कहकर वाहवाही बटोरीं। कवयित्री आशा रानी ने मां की ममता पर ‘दुनियां की तपिश में खुद को जलता छोड़ आई हूं, मैं अपनी मां के आंचल की ठंडी छांव छोड़ आई हूं’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। केंद्रीय विद्यालय नं एक (चंडीमंदिर) विद्यार्थी कशिश वर्मा ने ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ सुनाकर साहित्यकारों का आशीर्वाद प्राप्त किया। 

शशि गुरु ने धार्मिक रूढ़ियों पर सुनाया ‘धूप में जलते पांव लिए, कंधों पर कांवर भारी’ सुनाकर सोचने को मजबूर किया। मीना जागलान ने महिला सशक्तिकरण पर ‘कोमल नहीं वह शक्ति की पहचान है, हर मुश्किल से लड़ने वाली वह साहस की उड़ान है’ सुनाकर सबको मुग्ध कर किया। मोनिका कटारिया ‘मीनू’ ने अपनी कविता ‘देकर वचन चल दिये फिर सजन, हम दुनियादारी निभाते रहे’ सुनाकर श्रोताओं को विरह रस से भिगो दिया। गुरनाम सैनी (रामगढ़) ने सुंदर कविता ‘आऊंगा तेरे पास एक दिन, होली के रंगो से पुता हुआ’ सुनाकर सबको मोह लिया। विश्वजीत सिंह ‘शब्द’ ने महाभारत के गांधारी संवाद के तहत संजय द्वारा दार्शनिक दृश्य पर भावनात्मक काव्य प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि संगीता बेनीवाल ने बहुत शानदार हरियाणवी कविता ‘देखी तेरी गली बाबुल, आखिर छोड़ चली बाबुल’ सुनाकर सबका दिल जीत लिया। अंत में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि बालाजी प्रॉपर्टी के मुकेश कुमार और अन्य साहित्यकारों को सम्मानित किया गया श्रोताओं ने साहित्य का भरपूर रसास्वादन किया और आनंद उठाया।