कटनी, मध्यप्रदेश । एक तरफ सरकार 'पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया' और 'महिला एवं बाल विकास' के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। विकासखंड बहोरीबंद के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमाड़ी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासन की लापरवाही और नौनिहालों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को बयां करने के लिए काफी है।
यहाँ पिछले कई वर्षों से आंगनवाड़ी भवन पूरी तरह से जर्जर और खंडहर में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी बदतर है कि मासूम बच्चे और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता यहाँ बैठने तक को मजबूर हैं, लेकिन जान जोखिम में डालकर। मजबूरन, बच्चों को खुले आसमान और तपती धूप या मौसम की मार के बीच बैठकर शिक्षा और पोषण आहार लेना पड़ रहा है।
खंडहर बन चुका है भवन, हर वक्त बना रहता है हादसे का डर
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अमाड़ी ग्राम का यह आंगनवाड़ी भवन सालों से मरम्मत की बाट जोह रहा है। दीवारें दरक चुकी हैं, छत का प्लास्टर गिर रहा है और खिड़की-दरवाजे टूट चुके हैं। भवन की हालत इतनी खराब है कि कब कोई बड़ा हिस्सा गिर जाए और कोई बड़ा हादसा हो जाए, कहा नहीं जा सकता। ऐसे में हम अपने बच्चों को अंदर भेजने से डरते हैं।
अभिभावकों मैं बनी रहती है चिंता
मौसम चाहे कड़कड़ाती धूप का हो या आने वाली बारिश का, इस आंगनवाड़ी के बच्चों की तकदीर में 'खुली छत' ही लिखी है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भी बेहद विपरीत परिस्थितियों में काम कर रही हैं। भवन सुरक्षित न होने के कारण उन्हें बच्चों को खुले मैदान या पेड़ की छांव के नीचे बैठाकर पढ़ाना और संभालना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य पर लगातार खतरा मंडराता रहता है।
जिम्मेदार मौन, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
हैरानी की बात यह है कि इस समस्या की जानकारी स्थानीय स्तर पर कई बार सामने आ चुकी है, लेकिन अब तक महिला एवं बाल विकास विभाग या स्थानीय पंचायत प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। कागजों पर चलने वाली योजनाएं इस सुदूर गांव तक पहुँचते-पहुँचते दम तोड़ देती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ चुनाव के समय नेता और अधिकारी आते हैं, लेकिन इन मासूमों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिला ब्यूरो- अनिल चौधरी, कटनी, मध्य प्रदेश।
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