महराजगंज,नौतनवा एसआइआर के तहत नेपाली बहुओं से नागरिकता प्रमाणपत्र की मांग ने न सिर्फ परिवारों की नींद उड़ा दी है, बल्कि दशकों से बसे जीवन को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
नेपाल के जमुहनी जिला रुपन्देही विंजना पासी, अनीता देवी, सोनी, फूलकुमारी, प्रमिला की कहानी इस पीड़ा की सबसे सशक्त मिसाल है। 20 वर्ष पहले नौतनवा तहसील क्षेत्र के ग्राम बड़हरा में विवाह कर आईं भारत में ही उनका जीवन, परिवार और पहचान बनी, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी सैकड़ों महिलाएं हैं, जो दशकों से भारत में रह रही हैं, जिनके बच्चे, पोते-पोतियां यहीं जन्मे और पले-बढ़े, लेकिन अब उनसे यह पूछा जा रहा है कि वे अपनी नागरिकता साबित करें। परिजन असमंजस में हैं कि जब मायका ही अस्तित्व में नहीं, तो प्रमाणपत्र आखिर कहां से लाया जाए।
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